
व्यभिचार को अपराध मानने वाले 158 साल पुराने कानून की संवैधानिक वैधता पर गुरुवार को दूसरे दिन भी सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की। इसके प्रावधानों को बेतुका बताते हुए कोर्ट ने कहा, “महिला अगर पति की सहमति से व्यभिचार करे तो यह अपराध नहीं होता। क्या महिला पति की बपौती है?’ साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
from दैनिक भास्कर https://ift.tt/2LKdoce
No comments